
रिपोर्टर रामगोपाल बैरवा बांदीकुई दौसा अखंड भारत न्यूज़
खबर नारनौल 09 अक्तूबर मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के हमले को विभिन्न संगठनों ने बताया देशद्रोह – रोष स्वरूप राष्ट्रपति को लिखा पत्र 06 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर न्यायालय में हमला करने का है मामला कुछ दिन पूर्व अजीत भारती, बाबा रामदेव और अनिरुद्धाचार्य ने अपने-अपने यूट्यूब चैनलों पर खुले मंच से मुख्य न्यायाधीश की छाती को फाड़ने, अपमानजनक भाषा का प्रयोग और जनता को भड़काने व उकसाने का विडियो जारी कर रची गई थी साजिश नारनौल 09 अक्तूबर भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर 6 अक्टूबर को जूता फेंकने की घटना के मामले में विभिन्न संगठनों की रोष बैठक सर्व अनुसूचित संघर्ष समिति के तत्वावधान में आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता समिति के प्रधान चन्दन सिंह जालवान द्वारा की गई । बैठक में इस घटना पर भारी रोष प्रकट किया गया और सभी संगठनों द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर युक्त पत्र राष्ट्रपति व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजकर इस घटना के दोषी राकेश किशोर के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की और इसके साथ ही घटना की साजिश रचकर वीडियो जारी करने वाले अजीत भारती, बाबा रामदेव और अनिरूद्धाचार्य के खिलाफ भी आमजन को भड़काने व उकसाने पर आपराधिक मामला दर्ज करने व सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के विरुद्ध अपलोड किए गए सभी वीडियो को डिलीट करने की मांग की गई । बैठक का संचालन करते हुए समिति के महासचिव एवं कबीर सामाजिक उत्थान संस्था दिल्ली के वाइस चेयरमैन बिरदी चंद गोठवाल ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 6 अक्टूबर को संविधान के संरक्षक भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के ऊपर जूता फेंक कर हमला करना और धर्म का नारा लगाकर देश में विद्रोह फैलाने की यह घटना देशद्रोह के साथ-साथ न्यायपालिका के प्रति आपराधिक अवमानना और सरेआम संविधान की उल्लंघना को उजागर करती है क्योंकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 51(क) के अनुसार देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करें इस बारे में बोलते हुए डॉ शिवताज सिंह ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकना दलित अस्मिता, उसके स्वाभिमान और लोकतंत्र पर सीधा हमला है। वहीं लालाराम नाहर, चन्दन सिंह जालवान, अनिल फाण्डन, जसवंत भाटी, महेंद्र खन्ना, प्यारेलाल चवन, अमरसिंह निमहोरिया, मदनलाल, आशा पूनिया, रोशनी देवी, डॉ ओपी दायमा, सुंदरलाल जोरासिया, आदि ने कहा कि संविधान के उल्लंघना कर दिनांक 6 अगस्त 2025 को भारत संघ के मुख्य न्यायाधीश पर खुले न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अधिवक्ता राकेश किशोर द्वारा आपराधिक कृत्य किया गया, जो सर्वोच्च न्यायालय की आपराधिक और मानना के साथ-साथ देशद्रोह का मामला है । यहां यह गौर का विषय है कि कुछ दिन पूर्व अजीत भारतीय नाम के व्यक्ति ने और बाबा रामदास ने अपने-अपने यूट्यूब चैनल पर मुख्य न्यायाधीश के विरुद्ध अपमानजनक भाषा में वीडियो अपलोड कर जन-मन को गुमराह करने और उन पर हमला करने के लिए उकसाया। 22 सितंबर को कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने अपने यूट्यूब चैनल पर खुले मंच से मुख्य न्यायाधीश की छाती फाड़ कर हत्या करने जैसी धमकी का वीडियो अपलोड किया। इन बेलगाम कुकृत्यों से यह उजागर होता है कि इन घटनाओं से प्रेरित होकर 6 अक्टूबर की घटना को सोच समझकर साजिश के तहत अधिवक्ता राकेश किशोर द्वारा अंजाम दिया गया। देशद्रोह की इन कृतियों की विभिन्न सामाजिक संगठन घोर निंदा करते हैं और इनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग करते हैं बैठक में रोष प्रदर्शन करने वालों में सर्व अनुसूचित जाति संघर्ष समिति, अखिल भारतीय आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, कबीर सामाजिक उत्थान संस्था, महर्षि वाल्मीकि सभा, परिवर्तनकारी साहित्य मंच, गुरु रविदास महासभा, धानक समाज सभा, भारतीय सामाजिक परिवर्तन संघ, बार एसोसिएशन, भारतीय बौद्ध महासभा, सामाजिक विकास पथ, मानव समाज सेवा फाउंडेशन, हरियाणा प्रदेश चमार महासभा, एसएलजी अमन फाऊंडेशन इंडिया व अन्य पदाधिकारी बलबीर सिंह बबेरवाल, शिवनारायण मोरवाल, हरि सिंह बड़कोदिया, रोहतास सिंह, रामकुमार ढ़ैणवाल, तोताराम, राजेश चांवरिया, संतलाल खींची, हरि सिंह कलोरिया, गुगनराम, कन्हैयालाल कलोरिया, सन्नी लूनीवाल, सुमेर सिंह गोठवाल, एडवोकेट राहुल चौधरी, अमरनाथ सिरोहा, जोगेंद्र जैदिया, राम सिंह जोईया, ज्ञानी राम आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।संलग्न : रोष प्रकट करते विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी